Sat. Feb 27th, 2021

यमुना नदी के प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वतः संज्ञान लेने पर सुनवाई शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने यमुना नदी के प्रदूषण का स्वत: संज्ञान लिया है। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा से भी जवाब मांगा है। दिल्ली जल बोर्ड ने आरोप लगाया था कि हरियाणा से यमुना नदी में दूषित जल छोड़ा जा रहा है।
कोर्ट मित्र मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि 18 जनवरी को वॉटर क़्वालिटी लेवल अच्छा था, अमोनिया का लेवल भी कंट्रोल में है। अगर इसको कंट्रोल किया गया तो यह और बेहतर हो सकता है। मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि एनजीटी ने यमुना नदी के लिए एक मॉनिटरिंग कमेटी बनाई है, उसकी रिपोर्ट को कोर्ट को देखना चाहिए।
हरियाणा के वकील श्याम दीवान ने दिल्ली जल बोर्ड की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड द्वारा दायर की गई याचिका उचित नहीं है। याचिका में कई बातें विवादित हैं। श्याम दीवान ने कहा कि यमुना प्रदूषण को लेकर समस्याएं दिल्ली के भीतर हैं, हरियाणा से नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रदूषण नहीं चाहता है। हरियाणा को ऐसे पेश किया जा रहा है जैसे समस्या की जड़ हरियाणा ही है। सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को दिल्ली जल बोर्ड की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबडे़, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी। रामासुब्रमण्यम की पीठ ने दिल्ली जल बोर्ड की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें आरोप लगाया गया था कि हरियाणा अमोनिया की अत्यधिक मात्रा वाला दूषित जल यमुना नदी में छोड़ रहा है, जो क्लोरीन के साथ मिलने पर कैंसरकारी बन जाता है।
पीठ ने कहा कि हम बगैर किसी बहस के नोटिस जारी कर रहे हैं। हम समूची यमुना नदी में प्रदूषण के मामले का स्वतः संज्ञान ले रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हो रही सुनवाई के दौरान पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा को इस मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया।

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