मार्च और अप्रैल का महीना शरीर के लिए बेहद संवेदनशील
नई दिल्ली। मार्च और अप्रैल का महीना शरीर के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इन दिनों में मौसम के बदलाव का समय होता है, जब सर्दी धीरे-धीरे खत्म होकर गर्मी की शुरुआत होती है। इस संक्रमण काल को वसंत ऋतु कहा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान शरीर में जमा कफ पिघलने लगता है, जिससे सर्दी-खांसी, सुस्ती, पाचन संबंधी समस्याएं और शरीर में भारीपन जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में जरूरी हो जाता है कि खान-पान और दिनचर्या में बदलाव कर शरीर को संतुलित रखा जाए। आयुर्वेद के अनुसार, हेमंत और शिशिर ऋतु के दौरान शरीर में कफ का संचय होता है, जो वसंत के आते ही पिघलने लगता है। यही कारण है कि इस मौसम में बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अगर इस समय सही दिनचर्या और संतुलित आहार अपनाया जाए, तो इन समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।
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