पैक्स सिलिका में भारत को शामिल करने की बात.........क्यों कहा जा रहा अमेरिका का दोगलापान
नई दिल्ली। अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत को अमेरिका की अगुवाई वाली रणनीतिक पहल पैक्स सिलिका में शामिल होने का न्यौता मिलेगा। इसका मकसद दुनिया की सिलिकॉन और तकनीकी सप्लाई चेन को सुरक्षित, मजबूत, आधुनिक बनाना है। इसमें अहम खनिज, उन्नत मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर, एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और जुड़ी तकनीकें शामिल हैं। अमेरिका ने 12 दिसंबर 2025 को शुरू किया था। जापान, साउथ कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड्स, ब्रिटेन, यूएई, इजरायल और ऑस्ट्रेलिया इसका हिस्सा हैं।
आज की आधुनिक तकनीकें जैसे एआई, 5जी, डेटा सेंटर, रोबॉटिक्स, सेमीकंडक्टर सिलिकॉन और दूसरे अहम खनिजों पर टिकी हैं। अभी इनका बड़ा हिस्सा चीन के नियंत्रण में है। पैक्स सिलिका का मकसद इसी निर्भरता को कम करना है। इसके तहत भरोसेमंद देशों के साथ मिलकर सप्लाई चेन मजबूत की जाएगी।
भारत के लिए क्यों खास है?
भारत में अमेरिका के राजदूत गोर ने ऐलान किया कि भारत को अगले माह पहल में शामिल किया जाएगा, जिससे भारत-अमेरिका तकनीकी और सप्लाई चेन सहयोग को और आगे बढ़ाने का मौका मिलेगा। यह कदम विशेष रूप से भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भूमिका को मजबूत करने में मदद करेगा।
क्यों इस ऐलान को कहा जा रहा यूएस का दोगलापन
हालांकि, भारत को पैक्स सिलिका में शामिल करने के अमेरिकी बयान के बाद नीति को दोगलापन कहा जा रहा है। बता दें कि हाल ही में अमेरिका 60 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय संगठनों और संस्थाओं से अलग हुआ है। इसमें भारत की अगुआई वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने इंटरनेशनल सोलर अलायंस और 65 अन्य एजेंसियों को अमेरिका विरोधी, बेकार या फिजूलखर्ची वाले अंतरराष्ट्रीय संगठन बताया है।
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