गड्ढे, गंदगी और लापरवाही, MCD की कार्यप्रणाली पर सवाल
दिल्ली नगर निगम में अधिकतर अधिकारियों के तबादले और जिम्मेदारियों में बदलाव किए जाते हैं, लेकिन वहीं आम जनता की समस्याएं आज भी वैसी की वैसी ही हैं। हाल ही में एमसीडी के नवनियुक्त कमिश्नर संजीव खिरवार ने अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त स्तर के अधिकारियों के विभाग और जोन बदल दिए। फिर भी राजधानी दिल्ली में बुनियादी सुविधाओं की बदहाल तस्वीर लगातार सामने आ रही है। सड़कों पर गहरे गड्ढे, जगह-जगह कूड़े के ढेर, जाम पड़ी नालियां और खराब स्ट्रीट लाइटें लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर रही हैं। बरसात के दिनों में हालात और भी गंभीर हो जाते हैं, जब जलभराव से यातायात ठप हो जाता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इन सबके बीच Municipal Corporation of Delhi की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। निगम पर भ्रष्टाचार, लापरवाही और कमजोर निगरानी के आरोप लंबे समय से लगते रहे हैं। हर साल सफाई, सड़कों के निर्माण और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव की रफ्तार बेहद धीमी दिखाई देती है। स्थानीय लोग कहते हैं कि वे समय पर टैक्स चुकाते हैं, फिर भी पार्कों की देखभाल, सरकारी स्कूलों की स्थिति और अस्पतालों की व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या केवल नेतृत्व बदलने से हल नहीं होगी। जरूरत है पारदर्शिता, सख्त मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी तय करने की। अब जनता वादों से आगे बढ़कर ठोस और दिखाई देने वाले परिणाम चाहती है।
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