Fri. Apr 23rd, 2021

विशेष संवाददाता  

नई दिल्ली । तुर्की और पाकिस्तान के मध्य रक्षा क्षेत्र में बढ़ती नजदीकी और कश्मीर पर पाकिस्तान ता समर्थन करने वाले देश तुर्की को भारत रक्षा संबंधी निर्यात में कटौती कर रहा है। तुर्की को भारत सैन्य साजो-सामान तथा ड्यूअल यूज आइटम्स जैसे एक्सप्लोसिव्स तथा डेटोनेटर्स के निर्यात में इसलिए कटौती कर रहा है, क्योंकि उसे आशंका है कि वह इसका इस्तेमाल भारतीय हितों के खिलाफ कर सकता है। इस बीच, तुर्की के राष्ट्रपति की पाकिस्तान की निर्धारित यात्रा फिलहाल स्थगित कर दी गई है।
सीरिया में कुर्दो के नेतृत्व वाले सुरक्षाबलों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए अंकारा पर भारत सहित कई अन्य देशों का दबाव बढ़ रहा है। भारत ने पूर्वोत्तर सीरिया में ‘एकतरफा सैन्य कार्रवाई’ पर चिंता जताई है और इस बात पर जोर दिया है कि किसी भी कार्रवाई का मकसद क्षेत्र में शांति बनाए रखना और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई होना चाहिए। सूत्रों ने बताया है कि तुर्की के राष्ट्रपति रिजेब तैय्यप अर्दोआन द्वारा कश्मीर पर बार-बार दिए जा रहे बयानों और अंकारा द्वारा इस्लामाबाद को हथियारों की आपूर्ति में बढ़ोतरी को देखते हुए तुर्की को संवेदनशील उपकरणों के निर्यात पर रोक लगा दी गई है और इसे जल्द बहाल करने की भी कोई संभावना नहीं है। भारत से तुर्की को सैन्य उपकरणों की आपूर्ति कम है, लेकिन ड्यूअल यूज आइटम्स जैसे डेटोनेटिंग कॉर्ड, सेफ्टी फ्यूज तथा कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल में आने वाले एक्सप्लोसिव्स की व्यापार में हिस्सेदारी ज्यादा है। सीरिया में आईएसआईएस द्वारा हथियारों के किए गए इस्तेमाल पर कॉनफ्लिक्ट अर्मानेंट रिसर्च (सीओआर) द्वारा 2017 में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, आतंकवादियों द्वारा ज्यादातर आईईडी अटैक के लिए इस्तेमाल में लाए गए उपकरण भारतीय थे और उन्हें तुर्की सहित कई अन्य देशों को निर्यात किया गया था, जिसके बाद वे कॉनफ्लिक्ट जोन में पहुंच गए। एक रिपोर्ट में कहा था कि तुर्की शिपयार्ड के सहयोग से नौसेना के लिए फ्लीट सपोर्ट वेसेल्स के निर्माण की 2.3 अरब डॉलर की डील पर सुरक्षा संबंधित चिंताओं के मद्देनजर सवालिया निशान लग गया है और इसे रद्द किया जा सकता है।

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