विलेन से लेकर संवेदनशील किरदारों तक प्रकाश राज का शानदार फिल्मी सफर
मुंबई । ‘आली रे आली, आता तुमची बारी आली’यह डायलॉग सुनते ही जयकांत शिकरे का खौफनाक चेहरा सामने आ जाता है, जिसे प्रकाश राज ने फिल्म सिंघम में जीवंत किया था। अपने किरदार को और प्रभावशाली बनाने के लिए उन्होंने बॉडी लैंग्वेज में बदलाव करते हुए गुस्से को हाथों की खास हरकतों से जाहिर किया, जो स्क्रिप्ट का हिस्सा नहीं था। यही समर्पण उन्हें हिंदी और दक्षिण भारतीय सिनेमा का दमदार विलेन बनाता है।
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