Dark Mode
  • Friday, 01 May 2026
पीएम मोदी ने मिशन प्रमुखों को दिया 3टी का मंत्र 2047 के लिए कूटनीति में सुधार पर दिया जोर

पीएम मोदी ने मिशन प्रमुखों को दिया 3टी का मंत्र 2047 के लिए कूटनीति में सुधार पर दिया जोर

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए भारतीय राजनयिकों को व्यापार, प्रौद्योगिकी और पर्यटन (ट्रेड, टेक्नोलॉजी और टूरिज्म) यानी 3टी पर ध्यान केंद्रित करने का मूल मंत्र दिया है। नई दिल्ली में आयोजित 11वें मिशन प्रमुखों (एचओएम) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वैश्विक कूटनीति में क्रांतिकारी सुधारों की आवश्यकता को रेखांकित किया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने प्रधानमंत्री के इस संबोधन को भारतीय कूटनीति के लिए एक बेहतरीन क्षण बताया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा किया कि इस सम्मेलन के दौरान नेबरहुड फर्स्ट पॉलिसी, प्रवासी भारतीयों के साथ गहरे जुड़ाव और वैश्विक जोखिमों को कम करने (डी-रिस्किंग) की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की गई। जयशंकर के अनुसार, यह सम्मेलन सरकार, व्यापार और तकनीक जगत के दिग्गजों के विचारों से समृद्ध रहा, जो 2047 के लिए भारतीय कूटनीति में सुधार की थीम के बिल्कुल अनुरूप था।

विदेश मंत्रालय द्वारा 28 अप्रैल से 30 अप्रैल तक आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में दुनिया भर में तैनात भारत के राजदूतों और उच्चायुक्तों ने हिस्सा लिया। प्रधानमंत्री ने मिशन प्रमुखों को विदेशों में भारत के राष्ट्रीय हितों को बढ़ावा देने और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका अब केवल पारंपरिक कूटनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आर्थिक प्रगति और तकनीकी विस्तार का अहम स्थान है। सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि प्रधानमंत्री के समक्ष भविष्य के लिए तैयार कूटनीति और भारत की विकास गाथा को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करने से जुड़ी कई प्रस्तुतियां दी गईं। पीएम मोदी ने न केवल वरिष्ठ अधिकारियों के अनुभव सुने, बल्कि युवा राजनयिकों के दृष्टिकोण को भी तरजीह दी।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में योग सत्र, विचार-मंथन सत्र और उभरती प्रौद्योगिकियों पर विशेष टेबल टॉप अभ्यास भी किए गए। सम्मेलन की शुरुआत 29 अप्रैल को विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के उद्घाटन भाषण से हुई थी, जिसमें उन्होंने पिछले एक दशक में विश्व के साथ भारत की बढ़ती भागीदारी और अशांत विश्व में राष्ट्रीय लक्ष्यों को सुरक्षित करने की तत्परता पर जोर दिया था। 4 मई को आने वाले नतीजों से पहले, यह सम्मेलन भविष्य की सुदृढ़ भारतीय विदेश नीति की एक स्पष्ट झलक पेश करता है।

Comment / Reply From

Newsletter

Subscribe to our mailing list to get the new updates!